वन विभाग का दावा है कि पौधरोपण के लिए इसी साल 25 जुलाई को राशि जारी हुई है यानी मानसून सीजन में, लेकिन पौधे लगाने अब तक जमीन चिह्नांकित नहीं हो पाया है। जबकि दूसरी ओर पेड़ों की कटाई का दौर अब तक जारी है। रोजाना 24 घंटे में 19 लाख 71 हजार 330 लीटर ऑक्सीजन छोड़कर लोगों को प्राण वायु देने वाले 8 हजार 571 पेड़ों की कटाई के बाद 222.56 करोड़ खर्च कर एनएच 930 प्रोजेक्ट के तहत 37 किमी सड़क को 10 से 12 मीटर तक चौड़ी करने की तैयारी चल रही है। झलमला से शेरपार तक चौड़ीकरण प्रस्तावित है। भले ही यह प्रोजेक्ट लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे प्राण वायु के प्राकृतिक सोर्स को नुकसान हो रहा है।
नियमानुसार एक पेड़ काटने के एवज में 10 पौधे लगाना है।
इस हिसाब से कुल 85 हजार 710 पौधे लगाना है लेकिन अब तक एक भी पौधा लग नहीं पाया है। एक पेड़ 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन 24 घंटे में फ्री में छोड़ता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 550 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वन विभाग के अफसर तर्क दे रहे है कि बारिश के सीजन में पैसा जारी हुआ। वहीं एनएच विभाग के एसडीओ वीके सोयम कह रहे है कि पैसा जारी हो चुका है, लेकिन कब के सवाल में जवाब नहीं दे पा रहे है, फाइल देखकर जानकारी देने की बातें कह रहे है।
वहीं वन विभाग में पहले पदस्थ अफसरों के अनुसार पिछले साल राशि जारी हुआ था। कुल मिलाकर राशि जारी करने के डेट को लेकर भी संशय की स्थिति है। नौकरी का सवाल है इसलिए भी विभागीय अफसर व कर्मचारी चुप्पी साधे हुए है। दरअसल प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे 8 हजार 571 पेड़ों (छोटे-बड़े) की कटाई की जा रही है।
एक महीने के अंदर चिह्नांकित सभी हरे-भरे पेड़ों की कटाई हो जाएगी एनएच विभाग के अनुसार 90% पेड़ों की कटाई हो चुकी है, 10% बाकी है। जिसकी कटाई एक माह के अंदर हो जाएगी। इस लिहाज से पेड़ों की कटाई भविष्य में स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से नुकसानदायक साबित होगा, क्योंकि एक पेड़ हर दिन यानी 24 घंटे में लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है।
इस लिहाज से सालभर यानी 365 दिन में प्रोजेक्ट के दायरे में कटाई के लिए चिह्नांकित पेड़ों से लोगों को लगभग 71 करोड़ 95 लाख 35 हजार लीटर ऑक्सीजन फ्री में मिल रहा था। जिसकी कीमत लगभग 1065 करोड़ रुपए है। कोरोना काल के दौरान प्रशासन, शासन को ऑक्सीजन का महत्व समझ आया था, जब बाजार में ट्रांसपोर्टिंग चार्ज को जोड़कर एक लीटर ऑक्सीजन की कीमत लगभग 15 रुपए में मिल रही थी। हालांकि हालात अनुसार दाम बढ़ते-घटते रहते है। एक जंबो सिलेंडर में लगभग 45 लीटर ऑक्सीजन भरा रहता है।
- 93 लाख खाते में, पौधे रोपे बिना ही 8 हजार पेड़ों को काट चुका वन विभाग
- वन विभाग का दावा- पौधरोपण के लिए 25 जुलाई को राशि जारी, शासन के पीडी खाते में पैसे जमा
एनएच विभाग के अनुसार 90% पेड़ों की कटाई हो चुकी है, 10% बाकी है। जिसकी कटाई एक माह के अंदर हो जाएगी। इस लिहाज से पेड़ों की कटाई भविष्य में स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से नुकसानदायक साबित होगा, क्योंकि एक पेड़ हर दिन यानी 24 घंटे में लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। इस लिहाज से सालभर यानी 365 दिन में प्रोजेक्ट के दायरे में कटाई के लिए चिह्नांकित पेड़ों से लोगों को लगभग 71 करोड़ 95 लाख 35 हजार लीटर ऑक्सीजन फ्री में मिल रहा था। जिसकी कीमत लगभग 1065 करोड़ रुपए है। कोरोना काल के दौरान प्रशासन, शासन को ऑक्सीजन का महत्व समझ आया था, जब बाजार में ट्रांसपोर्टिंग चार्ज को जोड़कर एक लीटर ऑक्सीजन की कीमत लगभग 15 रुपए में मिल रही थी। हालांकि हालात अनुसार दाम बढ़ते-घटते रहते है। एक जंबो सिलेंडर में लगभग 45 लीटर ऑक्सीजन भरा रहता है।
एनएच विभाग का दावा है कि पौधरोपण के लिए 93 लाख और कटाई-छंटाई के 50 लाख रुपए दे चुके है। डीएफओ आयुष जैन, बालोद व दल्लीराजहरा के वन परिक्षेत्रीय अधिकारी राजेश कुमार नांदुरकर मैान हैं। वहीं उप वनमंडल अधिकारी मिथुन डाहिरे ने बताया कि एनएच विभाग की ओर से 25 जुलाई को राशि जारी होने की जानकारी है। जो शासन के पीडी खाते में जमा है।
एक्सपर्ट व्यू- तापमान बढ़ेगा
वनस्पति शास्त्र के प्रोफेसर दीपक गुप्ता, राकेश कुमार ने बताया कि पेड़ों की कटाई का सीधा नुकसान होगा। इससे पहले की तुलना में बारिश कम होने के साथ तापमान व प्रदूषण बढ़ेगा। एक पेड़ एक दिन में औसतन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ती है। बरसों पुराने पेड़ जैसे बरगद, पीपल यह 300 लीटर तक ऑक्सीजन छोड़ती है। पेड़ों की कटाई कर रहे है तो इसके आसपास कई गुना ज्यादा पौधे भी लगाना चाहिए।
