रायपुर| छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना महादेव घाट में खारुन नदी के किनारे हो रहे अवैध कब्जे के विरोध में नाविक संघ और मंदिर समिति के साथ मिलकर किया विरोध ,काफी बवाल के बाद मिली सफलता ।
महादेव घाट पर बनी सीढ़ियों पर करणी सेना के कुछ लोगों ने लकड़ी के पाटे लगाकर कब्जा कर रखा था। इसकी शिकायत मिलने के बाद छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वरा विरोध आंदोलन करेने की चेतवनी । इसके लिए महादेव घाट स्थित मंदिर के पुजारी और संगठन के पदाधिकारियों की बैठक हुई
काफी विरोध और बवाल के बाद नगर निगम की टीम ने शुक्रवार को पुलिस बल की मौजूदगी में इन पाटों को हटाकर जब्ती बनाने की कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि करणी सेना संगठन के लोगों ने पूजा-पाठ और धर्म के नाम पर घाट की सीढ़ियों पर पाटे लगा रखे थे
नदी में नाव चलाने वाले लोगों ने विरोध किया पर भी करणी सेना के लोग पाटे हटा नहीं रहे थे। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के शिकयत के बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए इन सभी पाटो को हटाकर जब्ती बनाया है।
गंगा आरती के नाम पर घाट पर कब्जा
महादेव घाट पर हर शाम करणी सेना के लोग गंगा की आरती करते थे। यह पहले सीढ़ियों पर ही किया करते थे, लेकिन बाद में सेना के लोगों ने आरती करने के लिए सीढ़ियों पर ही पाटे लगा दिए। घाट पर हर दिन शाम को ही घूमने वालों की भीड़ लगती है। इसमें कई लोग नाव की सैर करने भी पहुंचते हैं। पाटों के लगने के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत नाव चलाने वालों को होने लगी। नदी के किनारे सीढ़ियों पर लगे पाटों के कारण नाव को भी तट से लगा नहीं पाते थे, जिसके कारण लोगों को भी नाव में बैठने में परेशानी होती है। इस परेशानी के कारण नाव चलाने वालों ने पहले करणी सेना के लोगों से मांग की थी कि गंगा आरती के बाद वे पाटों को वहां से हटा दें, ताकि उन्हें भी परेशानी नहीं हो। इसके बाद भी करणी सेना ने पाटे हटाए नहीं, जिसके बाद इसकी शिकायत छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वरा जोन कार्यालय में की गई। निगम ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पाटों को हटाते हुए जब्ती बनाया है।
700 साल पुराने बाबा हटकेश्वरनाथ मंदिर के महंत, पुजारियों समेत सभी नाविक इन पाटों को हटाने की मांग पर अड़ गए हैं। उनके पक्ष में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी मैदान में उतर गई..
महादेवघाट के पुजारियों, महंत और नाविकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है। विरोध के चलते अब गंगा आरती को ही लेकर सवाल उठने लगे हैं। 700 साल पुराने बाबा हटकेश्वरनाथ मंदिर के महंत, पुजारियों समेत सभी नाविक इन पाटों को हटाने की मांग पर अड़ गए हैं। उनके पक्ष में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी मैदान में उतर गई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने कहा-
अमित बघेल का कहना है कि महादेवघाट में दूर-दराज से लोग मुंडन आदि संस्कार करवाने आते हैं। बड़े-बड़े पाटे लगाने से नित्य संस्कार के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। इससे नाविकों का व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
घाट पर खारुन आरती करने की परंपरा में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए अमित बघेल ने कहा कि खारुन आरती की परंपरा मंदिर स्थापना के समय यानी सदियों पुरानी है। महंत पंडित सुरेश गिरी 11 पीढ़ी से खारुन आरती करते आए हैं। यहां छत्तीसगढ़ी में खारुन आरती करने की परंपरा रही है। गंगा मां का पूरा सम्मान है, लेकिन खारुन तट पर गंगा आरती की नई परिपाटी शुरू कर छत्तीसगढ़ी अस्मिता से छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है।
चंदा वसूली के लिए फ्लैक्स पर बड़े-बड़े क्यूआर कोड लगाए गए हैं। ऐसे फ्लैक्स महादेवघाट से निकलकर अब पूरे शहर में नजर आने लगे हैं। इससे भी साफ है कि यह धर्म से ज्यादा व्यापारिक आयोजन बनता जा रहा है। बघेल ने कहा कि हमें आरती से कोई आपत्ति नहीं है। रोज आरती हो, लेकिन यह छत्तीसगढ़ी में होगी। इस आरती को हटकेश्वरनाथ मंदिर के महंत और पुजारी संपन्न कराएंगे। सेना ने खारुन गंगा आरती के लिए अन्य राज्यों से बुलवाए गए पंडितों का सत्यापन कराने और घाट पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को तत्काल हटाने की मांग की है।

