दिवाली के पहले बारिश से उधड़ी और गड्ढों वाली सड़कों की मरम्मत को मशीन से शुरू कर दी गई है, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि सभी सड़कों को दुरुस्त करना संभव नहीं होगा। पिछले एक सप्ताह में मशीन के जरिए केवल दो हजार वर्गफीट क्षेत्रफल यानी करीब 80 जगह के गड्ढों को ही भरा जा सका है। इस तरह मशीन से एक दिन में औसतन 285 वर्गफीट सड़क के 15 गड्ढों की ही मरम्मत कर रही है। ऐसे में अगले 12 दिनों में 500 से ज्यादा गड्ढों व उधड़ी हुई सड़क को समतल करना मुश्किल होगा। निगम के अफसरों ने भी बैठक लेकर काम की रफ्तार बढ़ाने को कहा है।
निगम ने दिल्ली की कंपनी को गड्ढे भरने का ठेका दिया है। ठेके की शर्त के अनुसार कंपनी को मशीन से हर खराब सड़क का पैचवर्क करना है। इसके लिए गड्ढे की साइज भी तय है। गड्ढा न्यूनतम दो मीटर बाई एक मीटर यानी लगभग 18 वर्गफीट से छोटा नहीं होना चाहिए। छोटे गड्ढों को मशीन से नहीं दिया जाएगा। मशीन के माध्यम से बड़ी साइज के गड्ढों को भरा जाएगा। मशीन के माध्यम से गड्ढे भरने का काम करीब एक हफ्ते पहले शुरू किया गया है। अफसरों ने उस की समीक्षा की।
इसी दौरान आंकलन किया गया कि सप्ताहभर में केवल दो हजार वर्गफीट तक के गड्ढों की फीलिंग ही की गई है। इस तरह प्रतिदिन का औसत निकालने पर रोज का औसत 285 वर्गफीट आ रहा है। गड्ढों की साइज का आंकलन करने से पता चला रहा है कि एक दिन में पंद्रह-सोलह गड्ढे ही भरे जा रहे हैं। काम की धीमी गति को लेकर सवाल उठाया जा रहा है। यदि मशीन से भी इसी रफ्तार से काम होता रहा, तो त्योहार के दौरान शहर की कई सड़कों पर गड्ढे नहीं भरे जा सकेंगे। हालांकि निगम अफसरों का कहना है कि हमारा लक्षय दिसंबर तक सभी सड़कों पर हुए गड्ढे भरना है। दिल्ली की कंपनी मेसर्स ट्रांस मेटेलाइट इंडिया लिमिटेड को करीब 3 करोड़ में ठेका दिया गया है।
निगम कमिश्नर मयंक चतुर्वेदी ने भी काम को लेकर कंपनी की रफ्तार पर ऐतराज जताया है। उन्होंने निगम अफसरों को निर्देश दिया है कि रफ्तार बढ़ाने के लिए कंपनी और मशीन लगाए। मैनुअल भी काम करवाएं। निगम के लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता हेमंत शर्मा ने कहा कि फिलहाल स्टेशन रोड, तेलघानी नाका, राठौर चौक के आसपास बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इसलिए वहां काम किए जा रहे हैं।
इसके बाद पूरे शहर के गड्ढों की मरम्मत की जाएगी।
गड्ढे भरने के लिए मंगवायी गई मशीन की साइज खासी बड़ी है। दिन में ट्रैफिक की दिक्कत की वजह से रात 10 बजे से काम किया जा रहा है। इस दौरान बारिश हुई तो काम बंद करन पड़ जाता है। अफसरों के अनुसार सड़क को पहले 140 डिग्री तापमान पर पिघलाया जाता है।
इसके बाद जरूरत के अनुसार गड्ढे में मशीन से मटेरियल भरा जाता है। गड्ढा होने से आसपास की सड़क थोड़ी ऊपर-नीची रहती है। मशीन इसे भी समतल करती है। फिलहाल एक ही मशीन से काम किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि एक और मशीन मंगवायी जाएगी। इससे काम की रफ्तार बढ़ जाएगी।
मशीन से केवल फोरलेन, सिक्स लेन और टू-लेन सड़कों के गड्ढों को ही ठीक किया जा रहा है।
बाइपास और सिंगल लेन वाली सड़कों के गड्ढे मशीन से ठीक नहीं किए जाएंगे। अफसरों के अनुसार मशीन की साइज ऐसी है कि इसे संकरी और बाइपास सड़कों पर नहीं ले जाया जा सकता। संकरी और बाइपास सड़कों के गड्ढों को मेनुअली यानी परंपरागत तरीके से भरे जाएंगे।
ये सड़कें सबसे ज्यादा खराब
- तेलीबांधा तालाब के सामने भी हेवी ट्रैफिक वाली रोड
- पचपेढ़ीनाका चौक से टिकरापारा जाने वाली रोड
- साइंस सेंटर से सड्ढू हाऊसिंग बोर्ड जाने वाली रोड
- दलदल सिवनी से जब्बार नाला जाने वाली रोड
- मोवा से मंडी गेट वाली बाइपास रोड
- पंडरी कपड़ा मार्केट जाने वाली रोड
- सिद्धार्थ चौक से टिकरापारा वाली रोड
- फाफडीह से रेलवे क्रासिंग वाली रोड
- जेल रोड से फाफाडीह वाली सड़क
- मोतीबाग औलिया चौक से शास्त्री चौक
- भैंसथान से अग्रसेन चौक सड़क
