अब वे दूसरे विश्वविद्यालयों और कालेजों में जाकर पढ़ा सकेंगे। विषय विशेषज्ञ के रूप में वहां पढ़ाने पर उन्हें प्रति पीरियड एक हजार रुपए मानदेय मिलेगा। आने -जाने के लिए 500 रुपए अलग से मिलेंगे। यदि कालेज स्थानीय ही है तो उन्हें इंसेंटिव के 250 रुपए मिलेंगे। यह काम वे वर्तमान दायित्वों के अतिरिक्त कर सकेंगे। दरअसल यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने नई गाइड -लाइन जारी की है।
छत्तीसगढ़ के विवि के कुलपति भी नई व्यवस्था पर काम करने की योजना बना रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इसके अनुसार अब कालेजों और विवि को अपने यहां की दस फीसदी पोस्ट विषय विशेषज्ञ प्राध्यापकों व स्किल्ड वालों के लिए रखनी होगी। वे इन पदों पर अधिकतम तीन साल के ऐसे प्राध्यापकों को हायर कर सकेंगे। नई व्यवस्था में पीएचडी व नेट की अनिवार्यता से भी अधिक एक्सीलेंस को महत्व दिया गया है। इसके साथ ही प्राध्यापक साल में 30 दिन शैक्षणिक कार्यों जैसे सेमीनार आदि के लिए भी अवकाश ले सकेंगे।
इसका यह लाभ भी होगा कि किसी विवि या कालेज में कोई महिला प्रोफेसर प्रसूति या शिशु अवकाश पर है तो इंगेजिंग प्रोफेसर को बुलाया जा सकेगा। इससे महीनों पढ़ाई से वंचित होने वाले छात्रों की पढ़ाई बरबाद नहीं होगी। शिक्षा के अधिकार के तहत हर छात्र को रूचि के अनुसार पढ़ाई की सुविधा देने ऐसा किया गया है।
यूजीसी की नई गाइडलाइन | गैर परंपरागत शिक्षकों के रूप में अनुभवियों की भी ले सकेंगे मदद
ये फायदे होंगे
- जरूरत के युवा मिल सकेंगे।
- विशेषज्ञों व स्किल्ड लोगों का नॉलेज ट्रांसफर होगा।
- अपरंपरागत शिक्षा यानी अनुभव की कद्र होगी।
- छात्रों में स्किलिंग की भावना बढ़ेगी।
- फार्मल टीचर भी विशेषज्ञ के साथ रहकर काम सीख सकेंगे।
नई व्यवस्था से कालेजों व विवि का खर्च कम होगा। वे विशेषज्ञों के खाली पदों पर इंगेजिंग प्रफेसर बुलाकर पढ़ाई करवाएंगे। उन्हें पीरियड के अनुसार मानदेय देंगे। जबकि नियमित प्रोफेसर का वेतन ही करीब ढाई लाख रुपए महीना होता है। जीपीएफ और अन्य चीजों की झंझट से भी कालेज व विवि प्रबंधन बच सकेंगे। हालांकि इंगेजिंग प्रोफेसर को मिलने वाले मानदेय को आयकर के दायरे में रखा गया है। कालेज-विवि मानदेय सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर करेंगे।
इंदिरा गांधी कृषि विवि में भी हमने तैयारी प्रारंभ कर दी है। यूजीसी की नई -गाइड लाइन पर अमल करने सभी कालेजों के प्राचार्यों की बैठक बुलाई जा रही है। जल्द ही इस पर काम होने लगेगा। नई व्यवस्था से बाजार आधारित एचआर डेवलप होगा। -प्रो. डॉ. गिरिश चंदेल, कुलपति आईजीकेवी
