प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास नवनिर्मित महाकाल लोक का लोकार्पण किया। यहां उन्होंने रिमोट द्वारा रक्षा सूत्र से बने शिवलिंग से पर्दा हटाया। उज्जैन आते ही प्रधानमंत्री सबसे पहले महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे, यहां उन्होंने षोडशोपचार पूजन किया और फिर गर्भगृह में ही बैठकर जाप किया। इसके बाद बाहर नंदी जी के पास बैठकर प्रार्थना की। कार्तिक मेला ग्राउंड में प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा का संबोधन हर-हर महादेव और जय श्रीमहाकाल के साथ किया। उन्होंने कहा कि महाकाल की नगरी प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है। इसी कार्यक्रम में गायक कैलाश खेर ने महाकाल गान की प्रस्तुति दी।
भगवान महाकाल एकमात्र ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं जो दक्षिणमुखी है
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान महाकाल एकमात्र ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं जो दक्षिणमुखी है। यह शिव के ऐसे स्वरूप हैं जिनकी भस्म आरती विश्व में प्रसिद्ध है। यहां की भस्मारती के हर भक्त दर्शन करना चाहता हैं। इस परंपरा में भारत की जीवटता और अपराजेय अस्तित्व को भी देखता हूं। हमारे ज्योतिर्लिंग का विकास भारत का आध्यात्मिक विकास है। भारत का आध्यात्मिक दर्शन एक बार फिर शिखर पर पहुंचकर विश्व के मार्गदर्शन के लिए तैयार हो रहा है।
हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के साथ पीएम ने शुरू किया भाषण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के साथ संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन की यह ऊर्जा, आशा, महाकाल की यह महिला। महाकाल के लोक में सबकुछ अलौकिक है। यह मैं आज महसूस कर रहा हूं, महाकाल का आशीर्वाद जब मिलता है तो काल की रेखाएं मिट जाती है। महाकाल लोक की यह भव्यता भी समय की सीमाओं से परे आने वाले पीढि़यों को दर्शन कराएगी। मैं राजाधिराज महाकाल के चरणों में नमन करता हूं। देश और दुनिया में महाकाल के भक्तों को बधाई देता हूं।
महाकाल लोक अतित के गौरव के साथ भविष्य का कर रहा स्वागत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, सोमनाथ, केदारनाथ, बदरीनाथ धाम में नवनिर्माण, अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण तथा चारधाम निर्माण प्रोजेक्ट में आल वेदर रोड बन रही। भारत अपनी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक चेतना के स्थलों का पुनर्निर्माण कर रहा है। जब हम उत्तर से दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक अपने प्राचीन मंदिरों को देखते हैं, तो उनका सांस्कृतिक वैभव, उनकी विशालता व वैज्ञानिकता हमें आश्चर्य से भर देती है। महाकाल लोक अतित के गौरव के साथ भविष्य के स्वागत के लिए तैयार हो गया है। हम उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक अपने प्राचीन मंदिर को देखते हैं तो उनकी विशालता, उनका वास्तु हमें आश्चर्य से भर देता है। यह भारत का अमृत महोत्सव का हाल है। इस अमृत काल में यह राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक चेतना का पुनः आह्वान कर रहा है। देश भर के विभिन्न प्राचीन मंदिरों का जिक्र कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। हमारे ऋषि-मुनियों, विद्वानों ने प्राचीन काल में बिना तकनीक और आधुनिकता के ही ऐसे विराट निर्माण कैसे किए होंगे, यह देखकर दुनिया चकित होती है।
