
रितिका ध्रुव महासमुंद जिले के पुरातात्विक नगरी सिरपुर में रहती हैं. लेकिन पढ़ाई करने इन्हें हर दिन जिला मुख्यालय महासमुंद के स्वामी आत्मानंद इंगलिश मीडियम स्कूल तक 43 किलोमीटर का सफर तय करना होता है. इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो रितिका बेहद सामान्य परिवार से है. जहां इनके पिता साइकल रिपेयरिंग की छोटी सी दुकान सिरपुर में चलाते हैं. इस लिहाज से रितिका का इसरो तक का सफर उसकी मेहनत और पढ़ाई के लिए रूचि बेहद अहम हो जाता है.यही वजह है कि रितिका ध्रुव की इस सफलता से जिले में हर्ष और गौरव का माहौल है.
दरअसल, महासमुंद जिले के पुरातात्विक नगरी सिरपुर की रहने वाली रितिका ध्रुव स्वामी आत्मानंद इंगलिश मीडियम स्कूल नयापारा में 11वीं क्लास में पढ़ती है, उसका चयन नासा के सिटिजन साइंस प्रोजेक्ट अभियान के लिए हुआ है. इस प्रोजेक्ट के तहत नासा इसरो के साथ अंतरराष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग कार्यक्रम में साझेदारी का हिस्सा है.
छत्तीसगढ़ बेटी रितिका ध्रुव ने कुछ ऐसा (mahasamund Trible girl ritika dhruv ) किया. जिसके कारण अब उनका नाम देश हीं नहीं विदेश में भी लिया जाएगा. 16 वर्षीय रितिका कक्षा पहली से लेकर 9 वीं तक की पढ़ाई मिशन स्कूल तुमगांव में हुई.दसवीं में रितिका का एडमिशन स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बसना में हुआ. जहां रितिका ने छात्रावास में रहकर पढ़ाई की और दसवीं में 89 प्रतिशत अंक लाकर अपने क्षेत्र का गौरव बढ़ाया.
