राज्य में कई साल के बाद ऐसा हो रहा है जब शिक्षा के अधिकार के तहत जिले में 2000 और राज्यभर में 25 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। दो राउंड के बाद अब तीसरा राउंड नहीं होगा।
इसलिए इन सीटों पर इस साल प्रवेश नहीं होगा। दो राउंड में एडमिशन के बाद अभी तक केवल 5510 सीटों पर ही छात्रों ने प्रवेश लिया है। शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी 30 अगस्त तक कम से कम 500 और सीटों में प्रवेश दिया जाएगा।
यानी एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या छह हजार के ही आसपास पहुंचेगी। शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश के लिए दो चरण हो चुके हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों की दिलचस्पी नहीं होने की वजह से अब तीसरा राउंड नहीं होगा। ज्यादातर छात्रों ने हिंदी मीडियम स्कूल से दूरी बना ली है। इस साल भी अंग्रेजी स्कूलों की तुलना में हिंदी स्कूलों में प्रवेश आधे भी नहीं हुए हैं।
शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए मार्च-अप्रैल में प्रक्रिया शुरू की गई थी।
शुरुआत में आठ हजार सीटों के लिए आवेदन मंगाए गए थे। प्रवेश के पहले चरण में ही इन सीटों के मुकाबले करीब 17 हजार आवेदन मिले। सीटें कम और आवेदन ज्यादा होने की वजह से माना जा रहा था कि पूरी सीटें भर जाएंगी।
लेकिन आवेदनों की जांच की गई तो पता चला कि बड़ी संख्या में फार्म अधूरे भरे थे। अधिकतर ने फॉर्म भी गलत भरे थे। इस वजह से छात्रों को केवल 5 हजार सीटों पर ही प्रवेश मिल पाया। खाली सीटों को भरने के लिए दूसरा राउंड आयोजित किया गया, लेकिन इसमें भी केवल 1100 सीटें ही अलॉट हो पाई। अभी इनमें 500 ने ही दाखिला लिया है।
