कांकेर में 700-800 ग्रामीणों ने चार ईसाइयों के घरों पर तोड़फोड़ की और उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि या तो गांव छोड़कर चले जाएं या मूल धर्म में लौट जाएं। हालांकि इस मामले में अभी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
गांव के आदिवासियों (Tribals) ने आरोप लगाया है कि यहां ईसाई मिशनरी लोगों को विभिन्न प्रकार के लालच देकर धर्म परिवर्तन (conversion) करवा रहे हैं।
अंतागढ़ थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम मासबरस से ये मामला सामने आया है। यहां के लोगों में बीते कई दिनों से मतांतरण को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। लेकिन सोमवार को 700 से 800 ग्रामीणों ने चार ईसाईयों के घरों पर धावा बोल कर तोड़फोड़ की।
चर्च में लगाया ताला
यहां दो दिन पहले ही पास के गांव अमोड़ी में चर्च में हो रही प्रार्थना सभा को बंद करवाया गया था। चर्च से सामान बाहर निकाल ताला भी लगा दिया गया था। दुर्गुकोंदल थाने में इस संबंध में रिपोर्ट भी दर्ज करवायी गई थी। हालांकि इसी लेकर अभी तक किसी भी उच्च अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है।
जब दोनों पक्षों को बुलाकर इस बारे में बात की गई तो स्थानीय ग्रामीण आदिवासियों का कहना था कि आप किसी भी धर्म को मानने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। लेकिन सार्वजनिक तरीके से यदि कोई अनुष्ठान या धार्मिक सभा की जाएगी तो उसका विरोध किया जाएगा। हालांकि इस पर अंतागढ़ के एडिशन एसपी खोमन सिंह ने कहा कि इस तरह कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए।
दो गांवों अंतागढ़ व दुर्गूकोंदल में में मतांतरण के विरोध के दो मामले सामने आने के साथ ही वाद विवाद शुरू हो गया। लालच देकर मतांतरण करवाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ये गलत है। जबकि दूसरे समुदाय का कहना है कि लालच देकर मतांतरण का मामला पूरी तरह से गलत है। ऐसा कर किसी समुदाय को बदनाम नहीं किया जा सकता
