उच्च शिक्षा से जुड़े 500 से ज्यादा कॉलेजों में पढ़ाई अब नए तरीके से हो रही है। तकनीकी, कृषि और चिकित्सा शिक्षा के कॉलेजों को शामिल किया जाए तो इनकी संख्या करीब 700 होती है। अब इन सभी कॉलेजों में पढ़ाई का सिस्टम ही बदल गया है। कॉलेजों में स्मार्ट बोर्ड का उपयोग हो रहा है। कोई भी सब्जेक्ट बोरिंग न हो इसलिए हर विषय की पढ़ाई के लिए नए इनोवेशन किए जा रहे हैं।
इंजीनियरिंग छात्र सॉफ्टवेयर से ड्राइंग-डिजाइन बना रहे हैं।
बीए, बीकॉम व बीएससी की पढ़ाई में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। पहली बार इसका पूरा सिलेबस भी बदला जा रहा है। छात्रों को पढ़ाई ऐसी कराई जा रही है कि डिग्री मिलते ही नौकरी के अलावा नया काम आसानी से शुरू कर सकें। कॉलेजों में हो रहे बदलाव को लेकर दैनिक भास्कर ने खास रिपोर्ट तैयार की।
कॉलेजों में सबसे पहले ब्लैक बोर्ड पर पर चॉक से पढ़ाई होती थी। फिर ग्रीन बोर्ड आया। अब तकनीकी हो या सामान्य शिक्षा लगभग सभी जगहों पर स्मार्ट बोर्ड लग गए हैं। इस बोर्ड की खासियत है कि इसमें पेन या हाथ दोनों से लिखा जा सकता है। जो लिखा उसे सुरक्षित भी रख सकते हैं। राजधानी के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, महंत कॉलेज समेत कई संस्थानों में क्लासरूम स्मार्ट हो चुके हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई में सॉफ्टवेयर का उपयोग होने लगा है। पहले सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल में हाथ से ड्राइंग-डिजाइन बनाए जाते थे। अब कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है।
साल में एक बार परीक्षा वार्षिक परीक्षा आयोजित करने का पैटर्न भी बदल गया है। राज्य के कॉलेजों में बीए, बीकॉम व बीएससी की पढ़ाई सेमेस्टर सिस्टम से ही हो रही है। इसी सत्र से इसकी शुरुआत हुई है। राज्य के ऑटोनोमस कॉलेजों के बाद अगले साल से इस सिस्टम को सभी शासकीय व निजी काॅलेजों में भी लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही कई साल के बाद यूजी के कोर्स में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार कॉलेजों में यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। ऑटोनोमस कॉलेजों में नया सिलेबस लागू भी हो चुका है।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब लेक्चर से ज्यादा प्रैक्टिकल पर फोकस कर रहे हैं। हर कॉलेज में स्मार्ट क्लास व स्किल लैब अनिवार्य कर दी गई है। स्मार्ट क्लास रूम में एलईडी विथी प्रोजेक्टर के साथ ही थ्रीडी एनिमेशन से पढ़ाई कराई जा रही है। स्मार्ट क्लास में लेक्चर नहीं बल्कि ऑडियो विजुअल टीचिंग अनिवार्य कर दी गई है।
इससे छात्रों को किसी विषय को समझने में बेहद आसानी होती है। रायपुर मेडिकल कॉलेज के सभी 5 लेक्चर हॉल को स्मार्ट क्लास में बदल दिया गया है। एमबीबीएस छात्रों को फर्स्ट ईयर में ही ऐसी पढ़ाई कराई जा रही है, जो आगे मददगार हो। स्किल लैब भी अनिवार्य किया है।
