छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए तरीके अपना रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर राज्य के पिछड़े व दूर-दराज के इलाकों में प्राइवेट कॉलेज चलाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 17 अक्टूबर को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला प्रदेश के पिछड़े, दुर्गम इलाकों में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद से लिया गया। यह गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पीपीपी माडल के तहत नए कालेजों का गठन राज्य के लिए एक नई बात है क्योंकि ऐसा यहां पहले कभी नहीं हुआ है। इस योजना के तहत राज्य में फिलहाल कोई भी कालेज संचालित हैं।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश निजी महाविद्यालय एवं संस्थान (स्थापना एवं नियमन) अधिनियम के तहत प्रदेश में 12 निजी महाविद्यालय शत-प्रतिशत नियमित अनुदान के तहत संचालित किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के बनने के बाद मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के उपरांत छत्तीसगढ़ अशासकीय महाविद्यालय एवं संस्थान (स्थापना एवं नियमन) अधिनियम, 2006 के तहत चार निजी महाविद्यालयों को 50 प्रतिशत राशि प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, तीन साल में एक बार भवन विस्तार, फर्नीचर, उपकरण की अधिकतम पांच लाख रुपये तक की खरीद के लिए तदर्थ अनुदान दिया जा सकता है। आवेदन के आधार पर अनुदान स्वीकृत किया जाता है।
अभी तक छत्तीसगढ़ अशासकीय महाविद्यालय एवं संस्थान (स्थापना एवं नियमन) अधिनियम, 2006 के आधार पर उपरोक्त अनुदान केवल उन्हीं निजी महाविद्यालयों को प्रदान किया जाता है जो कम से कम 10 वर्षों से संचालित हो रहे हैं। लेकिन प्रस्तावित पीपीपी मॉडल के तहत निजी कॉलेजों को शुरुआत से ही इस स्कीम के तहत रखा जाएगा। मालूम हो कि पीपीपी माडल का प्रस्ताव दूर-दराज के ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के मकसद से रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां भी बच्चे उच्च शिक्षा के हकदार बने और इसमें उन्हें कोई परेशानी न आए।
