अपनी पहचान के लिए मोहताज और सामाजिक तिरस्कार झेलते आ रहे छत्तीसगगढ़ के बस्तर के ट्रांसजेंडरों ने अपनी काबिलयत और हुनर से कमाल कर दिखाया है.
अब बस्तर में नक्सलियों से लोहा लेते इन लोगों को जल्द ही आप नक्सल मोर्चे पर तैनात देखेंगे. दरअसल पहली बार नई पहचान के साथ इन ट्रांसजेंडरों को बस्तर फाइटर्स में भर्ती के लिए राज्य सरकार से मौका मिला.
पुलिस की सबसे कठिन भर्ती प्रक्रिया में केवल एक या 2 नहीं बल्कि 9 ट्रांसजेंडरों ने सलेक्ट होकर अपने समाज को नई पहचान दिलाई है. जिसे देखते हुए बस्तर के अन्य ट्रांसजेंडरों में भी नई ऊर्जा का संचार हुआ है. बस्तर फाइटर्स में सलेक्ट हुए ट्रांसजेंडर छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बस्तर में अपनी सेवाएं देंगे. जो ट्रांसजेंडर समाज के लिए ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है.
दरअसल बस्तर के युवाओं को रोजगार देने के लिए और पुलिस में भर्ती होने के लिए बस्तर फाइटर्स भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडरों का कॉलम दिया गया था. पूरे बस्तर संभाग से पुलिस में भर्ती होने के लिए इन ट्रांसजेंडरों ने भी जी तोड़ मेहनत की और अपनी लगन से पुलिस की बौद्धिक और शारीरिक परीक्षा पास की. जिसके बाद बस्तर फाइटर्स के आये आखिरी नतीजे में बस्तर से 9 ट्रांसजेंडरों का चयन हुआ.
पुलिस भर्ती में सलेक्ट इन ट्रांसजेंडरों ने देश को यह संदेश दिया है कि उन्हें अपने हुनर दिखाने का मौका मिले तो वे महिला-पुरुष से कंधा से कंधा मिलाकर चल सकते हैं.
इन्होंने दिखाया है कि वह भी सम्मानजनक जीवन के हकदार हो सकते हैं. सलेक्ट हुए प्रतिभगियों का कहना है कि ट्रांसजेंडरों को समाज में कलंक माने जाने के कारण वे परिवार और समाज से काफी लंबे समय से बहिष्कृत ही रहे हैं. वे पूरी तरह से सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में प्रतिभागी होने से वंचित रहे हैं.
बस्तर फाइटर्स में भर्ती होने का सरकार ने मौका दिया और इस कठिन परीक्षा के लिए उन्होंने बहुत मेहनत किया और इस अवसर ने उनकी जिंदगी बदल दी ,छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी पाने को लेकर पूरे ट्रांसजेंडर समाज में काफी खुशी का माहौल है.
