तिरंगा बनाने से लेकर खरीदने के लिए लोगों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है. ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में पंजाब का शहर मलेरकोटला अहम योगदान दे रहा है. आमतौर पर हिंदू-मुस्लिम और सिख सांप्रदायिक झगड़े को लेकर खबरें चर्चा में रहती हैं, लेकिन इस बार पंजाब के मलेरकोटला की रहने वाली मुस्लिम महिलाएं तिरंगा बनाकर अपनी अनूठी पहचान बना रही हैं.
मुस्लिम महिलाएं बना रहीं तिरंगा
यहां की ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं देश का तिरंगा झंडा बना रही हैं. महिलाओं अपने छोटे-छोटे घरों में, छत पर या फिर जहां भी उन्हें जगह मिल रही है, वो तिरंगा बनाने के काम में जुटी हुई हैं. देश की आन बान और शान का प्रतीक तिरंगा झंडा बनाने का काम तेजी से जारी है. तिरंगा बनाने का काम स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी कर रही हैं तो वहीं, बुजुर्ग महिलाएं भी इस काम में लगी हैं.
देशभक्ति के साथ रोजगार भी
मलेरकोटला से लाखों की तादाद में तिरंगा झंडा बनकर देश के कोने कोने में जा रहा है. मलेरकोटला में 50 बड़े होलसेलर हैं जो मिलिट्री का सामान बनाने का काम करते हैं, जिनमें उनके कंधों पर लगने वाले वेजेस स्टार होते हैं और झंडे भी बनते हैं. एक-एक दुकानदार के पास लाखों में आर्डर हैं, जो उनसे पूरा नहीं हो रहा. झंडे के बीच में बनने वाला अशोक चक्र, जिसे मशीन पर तैयार किया जाता है. जिसके बाद झंडा सिलाई करने के लिए घरों में बैठी महिलाओं को दे दिया जाता है. इन महिलाओं को झंडे की साइज के आधार पर सिलाई का पैसा मिलता है. 15 से लेकर 40 तक 1 झंडे की कीमत इन महिलाओं को दी जाती है, इसलिए हर घर में महिलाएं झंडा बनाने में व्यस्त हैं.
300 से लेकर 1200 रुपये तक का झंडा
इबाद अली राणा ने बताया कि इस काम में मलेरकोटला की करीब पंद्रह सौ से दो हजार महिलाएं पिछले एक महीने से काम कर रही हैं और उनकी अच्छी कमाई हो रही है. हमारे पास पहले जो सिर्फ 500 से लेकर 1000 झंडे का ही आर्डर होता था, अब लाखों में है. हमारे पास 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक का झंडा है. अली राणा ने आगे कहा कि उन्हें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि मलेरकोटला द्वारा बनाया गया झंडा इस बार पूरे देश में सरकारी भवनों और लोगों के घरों पर लहराएगा.
