नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती हैं, किंतु कुछ सपेरे त्योहार आने के पहले ही जंगलों से सांप को पकड़कर लाते हैं। वे इन्हें नुकसान पहुंचाकर रुपए कमाने का माध्यम बना लेते हैं, ऐसे सपेरों पर वन विभाग द्वारा कार्रवाई की जा है। डीएफओ धार के निर्देश पर दोपहर तक 18 सांपों को सपेरों से मुक्त करवाया गया।
जैसा कि हम जानते है कि मंगलवार को नागपंचमी है और इस दिन लोग नागों का पूजन करते है। नागपंचमी में अवसर पर शहर से लेकर गांव तक धार्मिक मान्यताओं के आधार पर नागदेवता के दर्शन कर दूध पिलाया जाता है। जिससे जीवन में समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। लेकिन धार्मिक मान्याताओं को माध्यम बनाकर सपेरे वन्यजीवों को किस कदर कहर बरपाते है उसकी बानगी आज उस वक्त देखने मिली जब वन पुलिस ने टीम बनाकर सपेरों की धड़पकड़ का अभियान चलाया। जिसमें एक सपेरे ने पकड़ी हुई नागिन का मुंह फेवीक्विक से बंद कर दिया था। वन विभाग की टीम ने अभी तक आधा दर्जन सर्पों का रेस्क्यू किया गया है।
जानकारी अनुसार नागपंचमी के दिन सपेरे बड़ी बेरहमी से सर्पों के जहरीले दांत तोड़कर दर्शन करने के बहाने रुपये कमाते है और बाद में सर्प डेमेज होकर अपने प्राण त्याग देते है। वन विभाग की टीम के साथ मिलकर सर्पों को रेस्क्यू कर रहे है। जिसमें एक सपेरा ऐसी नागिन की प्रदर्शनी करवा रहा था जिसका मुंह उसने फेवी क्विक से लॉक कर रखा था, ताकि कोई नुकसान ना हो और वह आराम से अपना व्यापार कर सके। जिसे रेस्क्यू किया गया है। जिसका इलाज किया जा रहा है।
