मान्यता है कि जो भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
इस साल 2022 में जगन्नाथ यात्रा 1 जुलाई को निकाली जाएगी।
जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा इतिहास
कहते हैं, श्रीकृष्ण की मौत के पश्चात् जब उनके पार्थिव शरीर को द्वारिका लाया जाता है, तब बलराम अपने भाई की मृत्यु से अत्यधिक दुखी थे जिसके बाद वो कृष्ण के शरीर को लेकर समुद्र में कूद गए और उनके पीछे-पीछे बहन सुभद्रा भी कूद गईं. इसी समय भारत के पूर्व में स्थित पुरी के राजा इन्द्र द्विमुना को स्वप्न आता है कि भगवान का शरीर समुद्र में तैर रहा है, अतः: उन्हें यहां कृष्ण की एक विशाल प्रतिमा बनवानी चाहिए और मंदिर का निर्माण करवाना चाहिए. उन्हें स्वप्न में देवदूत बोलते हैं कि कृष्ण के साथ बलराम और बहन सुभद्रा की लकड़ी की प्रतिमा बनाई जाए. साथ ही श्रीकृष्ण की अस्थियों को उनकी प्रतिमा के पीछे छेद करके रखा जाए.
उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। जहां हर साल आषाढ़ माह में भव्य रथ यात्रा का आयोजन होता है। हिंदू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत अधिक महत्व है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ विराजमान हैं, जो कि श्रीहरि विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का ही रूप माने जाते हैं। जगन्नाथ का अर्थ होता है जगत के नाथ। आषाढ़ मास की द्वितीय तिथि को ये रथ यात्रा शुरू होती है और शुक्ल पक्ष के 11 वें दिन भगवान की वापसी के साथ इस यात्रा का समापन होता है। इस साल रथ यात्रा के उत्सव की शुरुआत 01 जुलाई 2022, दिन शुक्रवार से हो रही है। इस रथ यात्रा में भक्तों की भारी भिड़ देखने को मिलती है। मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के जीवन से सभी दुख, दर्द और कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
