छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल की घोषणा पर 24 घंटे में अमल हो गया। विशेष पिछड़ी जनजाति के पढ़े-लिखे युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। सोमवार को महानदी भवन मंत्रालय से सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत ने आदेश जारी कर दिया। आदेश के मुताबिक छत्तीसगढ़ में निवासरत अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, बैगा, कमार, पंडो एवं भुंजिया समुदाय के 9,623 युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। जीएडी ने प्रदेश के 17 जिलों के कलेक्टरों को आदेश जारी किया है। प्रदेश में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर विशेष पिछड़ी जनजातियों को सीधी भर्ती का लाभ मिलेगा।
यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीटर पर दी है। अगस्त 2019 में कांग्रेस सरकार ने इस संबंध में फैसला किया था,
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने सोमवार को बिलासपुर, मुंगेली, राजनांदगांव, कोरिया, कबीरधाम, कोरबा, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, कांकेर, महासमुंद, नारायणपुर, सूरजपुर और बलौदाबाजार के कलेक्टरों को एक पत्र जारी किया। इसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 27 अगस्त 2019 को जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में “विशेष पिछड़ी जनजातियों’ के शिक्षित और पात्र युवाओं का सर्वे कराकर नियुक्ति का फैसला हुआ था।
सर्वे के बाद जिलों में ऐसे शिक्षित युवाओं की संख्या 9 हजार 623 है। ऐसे में जिले में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर “विशेष पिछड़ी जनजाति’ के पात्र युवाओं को सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर भर्ती करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है। इस आदेश के साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं की सरकारी नौकरी का रास्ता खुल गया है।
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ की पांच जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में रखा है। इसमें अबूझमाड़िया, कमार, पहाड़ी कोरबा, बिरहोर और बैगा शामिल हैं। राज्य सरकार ने भी दो जनजातियों पण्डो और भुजिया को इस श्रेणी में शामिल किया है। इस तरह सात जनजातियां विशेष पिछड़े समूह के तौर पर चिन्हित हैं। ये जनजातियां 10-12 जिलों में ही निवास करती हैं।
