रायपुर। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्कूलों में पढ़ाई काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है। वहीं न्यायिक और राजस्व कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने की वजह से जिला न्यायालयों और तहसील न्यायालयों के कामकाज पर भी असर पड़ा है। इसकी वजह से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
कहा जा रहा है कि हड़ताल लंबी खिंची तो पक्षकारों की परेशानी बढ़ सकती है। कर्मचारी संगठनों ने मई में ही मुख्य सचिव को हड़ताल का नोटिस दे दिया था। इसके तहत चार चरणों के आंदोलन की बात थी। जुलाई में तीसरे चरण के तहत पांच दिन की हड़ताल की गई थी। हमारी मांग नहीं मानी गई। ऐसे में चौथे और अंतिम चरण के तौर पर कर्मचारी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। संगठनों का दावा है कि उनके आंदोलन में 100 से अधिक संगठन शामिल हो गए हैं। इसमें जिला, ब्लाक, तहसील मुख्यालय के कर्मचारियों के साथ न्यायायिक कर्मचारी संघ और तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का संगठन भी शामिल है।
फेडरेशन के संयोजक ने बताया की
कर्मचारी अपने मांगों को लेकर पिछले कई महीनों से आंदोलन में बैठे हैं, पर सरकार निराकरण नहीं कर पा रही है। संचालनालयों में कामकाज ठप्प हो चूका है। मंत्रालय के कर्मचारी संघ भी इस आंदोलन में शामिल नहीं हुए है। संचालनालय संघ के अध्यक्ष रामसागर कोशले ने बताया, इंद्रावती भवन के सभी कार्यालय बंद रहे हैं। संघ के कई पदाधिकारी इंद्रावती भवन के मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। मुख्य द्वार को अवरोध लगाकर बंद कर दिया गया है। जुलाई में पांच दिनों की हड़ताल के बाद सरकार ने महंगाई भत्ते में 6% इजाफे का आदेश जारी कर दिया। वहीं गृह भाड़ा भत्ता के लिए आश्वासन हाथ आया। उसके बाद कर्मचारी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 22 अगस्त से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए।
