छत्तीसगढ़ में युक्तिकरण प्रक्रिया के नाम पर हो रही अधिकारियों की मनमानी के विरोध में युक्तिकरण प्रताड़ित शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज़ उठा रहे है और दिनांक 22 और 23 दिसंबर को निर्णायक जंगी प्रदर्शन का ऐलान कर प्रशासनिक मनमानी से सरकार की हो रही बदनामी को ध्यान में रखते हुए एक मतदाता के हैसियत से प्रताड़ित शिक्षकों नेभारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव को एक खुला पत्र लिखा है
युक्तिकरण प्रताड़ित शिक्षकों ने ये प्रमुख बाते कहीं
1. बिना दावा-आपत्ति के दूषित सूची और जबरन काउंसलिंग युक्तिकरण प्रक्रिया में -बिना दावा-आपत्ति आमंत्रित किए,त्रुटिपूर्ण एवं दूषित वरिष्ठता/अधिशेष सूची तैयार कर,शिक्षकों को जबरन काउंसलिंग में सम्मिलित किया गया।यह प्राकृतिक न्याय, सेवा नियमों और शासन की घोषित प्रक्रिया तीनों का खुला उल्लंघन है।

2. युक्तिकरण के विरोधी नहीं अफसरशाही की मनमानी के विरोधी हैं
प्रदेशभर में हमारे बैनर, नारे और ज्ञापन एक ही स्पष्ट संदेश देते हैं
“युक्तिकरण से बैर नहीं, अफ़सरशाही की खैर नहीं।”
प्रभावित शिक्षकों की संख्या हजारों में होने के बावजूद हमारा आंदोलन सीमित उपस्थिति, शांतिपूर्ण व्यवहार और मर्यादित भाषा के साथ चल रहा है, ताकि शासन तक तथ्य पहुँचे, अव्यवस्था नहीं।
- 3. 2008 के सेटअप के विरुद्ध कार्रवाई और सदन में असत्य कथन
विधानसभा में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री महोदय द्वारा यह कहा गया कि 2008 का सेटअप बदला नहीं गया है तथा युक्तिकरण RTE 2009 एवं नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।जबकि वास्तविकता यह है कि –
पद संरचना 2008 के सेटअप के विपरीत घटाई गई,और इसे RTE 2009 व NEP 2020 का बहाना बनाकर वैध ठहराने का प्रयास हुआ।इस प्रकार अधिकारियों द्वारा सरकार से सदन में असत्य कहलवाया गया, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। - 4. मुख्यमंत्री समन्वय अनुमोदन के बाद भी नई मनमानी
हाल ही में मुख्यमंत्री समन्वय से अविशेष घोषित शिक्षकों को -कहीं यथावत रखा गया,तो कहीं उनके स्थान पर अन्य शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई।
यह दर्शाता है कि कुछ अधिकारी न केवल नियमों, बल्कि मुख्यमंत्री स्तर के निर्णयों का भी सम्मान नहीं कर रहे हैं। इसका सीधा परिणाम सरकार की बदनामी के रूप में सामने आ रहा है। - 5. अटल जी की सीख संघर्ष, लेकिन मर्यादित इस आंदोलन में हमने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की ओजस्वी पंक्तियों को अपना नैतिक संबल बनाया है – “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा।” अर्थात् युक्तिकरण की आड़ में हो रही मनमानी के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा, किंतु वह सदैव लोकतांत्रिक, संवैधानिक और अहिंसक रहेगा।
6. एक मतदाता के रूप में अपेक्षा ,यदि आज भी इस विषय पर संगठनात्मक मौन बना रहा, तो यह मौन -अधिकारियों की मनमानी का अप्रत्यक्ष समर्थन, और सरकार की हो रही बदनामी की मौन स्वीकृति माना जाएगा।
यह संघर्ष किसी दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि अन्याय, असत्य और प्रशासनिक अहंकार के विरुद्ध है।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे युक्तिकरण के विरोधी नहीं, बल्कि बिना दावा-आपत्ति, दूषित सूची, जबरन काउंसलिंग और नियम-विरुद्ध पदस्थापना के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि 2008 के सेटअप के विरुद्ध पद संरचना में कटौती कर इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं नई शिक्षा नीति 2020 का बहाना बनाकर वैध ठहराया गया, जिससे सरकार को सदन में गलत जानकारी प्रस्तुत करनी पड़ी। हाल ही में मुख्यमंत्री समन्वय अनुमोदन के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा मनमानी जारी है, जिससे सरकार की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो रही है।
हजारों प्रभावित शिक्षकों के बावजूद आंदोलन पूरी तरह संयमित, सीमित उपस्थिति और लोकतांत्रिक मर्यादा में संचालित किया जा रहा है। शिक्षक भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की पंक्तियों को अपना संबल मानते हुए कहते हैं—
“हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा।”
युक्तिकरण प्रताड़ित शिक्षकों ने संगठन एवं सरकार से अधिकारियों की मनमानी पर हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।
