कांकेर। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार श्रम पदाधिकारी के मार्गदर्शन में जिले के 14 बंधक मजदूरों को तमिलनाडु से वापस लाकर और मजदूरी राशि का भुगतान कराया गया।
कलेक्टर सिंह को कांकेर जिले के तहसील अंतागढ़ सरईपारा, फुलपाड़ निवासी संतुराम गावड़े द्वारा अपनी पुत्री को एस.एम.आर.फ्लाईएश ब्रिक्स, जुनजुपल्ली, बिलान्कुप्पम, जिला कृष्णागिरी तमिलनाडु में बंधक बनाने की शिकायत मिलने पर पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही करते हुए श्रमिकों को लाने के लिए रेस्क्यू दल का गठन किया गया।
गौरतलब है कि बंधक मजदूरों को तमिलनाडु में पिछले 3 महीनों से बंधक बनाकर मजदूरों से बिना मजदूरी दिए काम कराया जा रहा था। उक्त संबंध में जिला प्रशासन के द्वारा संज्ञान में लिया गया और टीम गठित कर 05 अप्रैल को तमिलनाडु जिला कृष्णागिरी से सभी श्रमिकों को 07 अप्रैल को कांकेर सकुशल पहुंचाया गया एवं बंधक श्रमिकों को जिला कलेक्टर को सकुशल वापसी के संबंध में अवगत कराया गया। बंधक श्रमिकों में कुल 30 श्रमिक को अवमुक्त कराया गया, जिसमें कांकेर जिले से 14, नारायणपुर जिले 10 और कोण्डागांव जिले से 06 श्रमिकों को अवमुक्त कराकर उनके परिवारजनों को सकुशल सौंपा गया। उक्त कार्यवाही में श्रम निरीक्षक टी.पी. तिवारी एवं श्रम उप निरीक्षक विवेक साव का विशेष योगदान रहा।

25 जनवरी की रात पति शराब के नशे में घर आया तो पत्नी से विवाद हो गया। इस दौरान गुस्से में पत्नी ने कहा कि वह बच्चे को मार डालेगी और खुद भी जान दे देगी। झगड़ा शांत होने के बाद पति-पत्नी अपने बच्चे के साथ सोए थे।
26 जनवरी की अलसुबह करीब 4 बजे पति उठा और पत्नी से गुड़ाखू लाने कहा। इस पर पत्नी वहां से उठकर चली गई। इसी बीच जब पति की नजर बिस्तर पर लहूलुहान पड़े बच्चे पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए। बच्चे का गला रेता हुआ था तथा पेट की अंतडिय़ां बाहर निकली थी। उसकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस कर रही महिला की तलाश

बच्चे की हत्या की सूचना पति ने कुन्नी चौकी में दी। सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और पंचनामा पश्चात बच्चे का शव बरामद कर पीएम पश्चात परिजन को सौंप दिया।
इस घटना से हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। लोगों के मन में यह सवाल भी है कि कहीं महिला ने भी तो कोई घातक कदम तो नहीं उठा लिया है? पुलिस अब महिला की तलाश कर रही है।

