कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में इस दिन नदियों में पुण्य स्नान करने की परंपरा रही है। रायपुर में सबसे ज्यादा लोग महादेवघाट पहुंचते हैं। इस दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है, लेकिन इस साल कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लग रहा है। यह शाम 5.21 बजे से शुरू होगा, जिसका मोक्ष शाम 6.19 बजे होगा। इसका सूतक सुबह 8.21 बजे से ही लग जाएगा। ऐसे में लोगों को सुबह 8.21 बजे के पहले ही पुण्य स्नान करना होगा।
मंगलवार को चंद्र ग्रहण में चलते कार्तिक पूर्णिमा के 1 दिन पहले यानी सोमवार किया जा रहा है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा में राजधानी के खारुन नदी के तट पर स्थित महादेव घाट में पुण्य स्नान करने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। वहीं नदी में लगने वाले नदिया मड़ई में जनसैलाब उमड़ता है। इस वर्ष मंगलवार 8 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा है, लेकिन इसी दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण धार्मिक कार्य का आयोजन नहीं किया जाता।
लोक आस्था के इस महापर्व की तैयारियां पूरी हो गई है। पूरे महादेव घाट व मंदिर परिसर को बिजली से रौशन किया गया है। महादेव घाट की छटा रंगीन लाइट से दृष्यनीय बनाया गया है। मीना बाजार, सर्कस, मौत का कुंआ, जादूगर का शो दिखाया जाएगा। मेले में मीना बाजार भी लग रहा है। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे के आसार हैं।
पंडितों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में इस दिन नदियों में पुण्य स्नान करने की परंपरा रही है। रायपुर में सबसे ज्यादा लोग महादेवघाट पहुंचते हैं। इस दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है, लेकिन इस साल कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लग रहा है। यह शाम 5.21 बजे से शुरू होगा, जिसका मोक्ष शाम 6.19 बजे होगा। इसका सूतक सुबह 8.21 बजे से ही लग जाएगा। ऐसे में लोगों को सुबह 8.21 बजे के पहले ही पुण्य स्नान करना होगा।
यह मान्यता
कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन सन 1428 से हो रहा है। जहां पर आसपास के सैकड़ों गांव के हजारों लोग मेला घूमने और पुन्नी स्नान करने के साथ ही महादेव घाट पर हटकेश्वर नाथ मंदिर का दर्शन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि 600 साल पहले राजा ब्रह्मदेव ने हटकेश्वर नाथ महादेव से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर 1428 में खारून नदी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा के दिन राजा ने अपनी प्रजा को भोज के लिए आमंत्रित किया।यह परंपरा मेले के रूप में परिवर्तित हो गई जिसे पुन्नी मेला के नाम से जाना जाता है।
