स्कूल शिक्षा विभाग अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए काम करता है, मगर विभाग का स्वयं का अनुशासन ही बिगड़ा हुआ है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विभाग में किताब, छात्रवृत्ति, यूनिफार्म और साइकिल का समय प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी विद्यार्थियों को समय पर इन योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से पढ़ाई व्यवस्था चरमरा गई है। निश्शुल्क सरस्वती साइकिल योजना हो या निश्शुल्क गणवेश योजना, महतारी दुलारी योजना हो या फिर निश्शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना, हर योजना में जिम्मेदारों की लापरवाही से अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल सरकार की छवि खराब होती है, बल्कि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है|
सरस्वती साइकिल के लिए अभी इंतजार
राज्य में निश्शुल्क सरस्वती साइकिल योजना में हर वर्ष देरी होती है। इसके लिए अफसरों ने कोई समय प्रबंधन नहीं किया। एक बार फिर स्कूली शिक्षा सत्र के तीसरे महीने में बालिकाओं को साइकिल नहीं मिल पाई है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर आदि जगहों पर अभी तक इसकी खरीदी के लिए कोई प्रक्रिया ही नहीं शुरू हुई है। प्रदेश की अनुसूचित जाति, जनजाति और बीपीएल परिवारों की बालिकाओं के लिए चल रही सरस्वती साइकिल योजना के तहत हर वर्ष करीब डेढ़ लाख बालिकाओं को साइकिल वितरित की जाती है|
फीस मिली न छात्रवृत्ति
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना की वजह से दिवंगत हुए अभिभावकों के विद्यार्थियों के लिए महतारी दुलार योजना शुरू की थी। राज्य के 733 विद्यार्थियों को अभी छात्रवृत्ति भी नहीं मिल पाई है। कोरोना के कारण बेसहारा हुए 6,480 विद्यार्थियों का राज्य में महतारी दुलार योजना के तहत पंजीयन किया गया है। इनमें से कुछ विद्यार्थी प्रदेश के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। वहीं 3,527 विद्यार्थी निजी स्कूलों में अध्ययनरत हैं। इनकी फीस सरकार को देनी है, जो करीब पांच करोड़ रुपये है। महतारी दुलार योजना में पहली से आठवीं के लिए पांच हजार और नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये छात्रवृत्ति देनी है। महतारी दुलार योजना के तहत रायपुर से 818 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें से 295 छात्र शासकीय स्कूल में और 523 छात्र निजी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे है।
