CG News : शंकुतला विद्यालय रामनगर में कक्षा नवमीं में पढ़ने वाले पीयूष जायसवाल दुनिया के ‘यंगेस्ट साइंटिस्ट” बन गए हैं। पीयूष ने वेग रहस्य पर शोध कर दुनिया के शीर्ष रिसर्च सेंटर से पीएचडी सर्टिफिकेट और रिसर्च लेवल अप्रूवल सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।
रायपुर में बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल की रिसर्च बुक ‘वेलोसिटी मिस्ट्री’ का विमोचन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। गरियाबंद के रहने वाले पीयूष की किताब को सीएम आवास में लॉन्च किया गया। ‘वेलोसिटी मिस्ट्री’ करीब 3 महीने पहले मार्च में प्रकाशित हुई थी। गरियाबंद के रहने वाले 12 साल के बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल पर पूरे प्रदेश को गर्व है। उसकी किताब एस्ट्रोफिजिक्स विषय पर है।
ब्रह्मांड जैसे जटिल विषय पर किताब लिखने वाले छात्र पीयूष जायसवाल ने अब सबसे कम उम्र में साइंटिस्ट बनने का गौरव हासिल किया है।
आठवीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए महज 12 वर्ष एक माह की आयु में ही यह कर दिखाया है।
अब तक यह रिकार्ड वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम था जिन्होंने 17 वर्ष की उम्र में शोध किया था। वाशिंगटन स्थित सबसे बड़े रिसर्च सेंटर आइजेएसईआर (इंटरनेशनल जनर्ल्स आफ साइंटिफिट एंड इंजीनियरिंग रिसर्च) ने पीयूष जायसवाल के रिसर्च को मान्यता प्रदान की है। पीयूष ने बीते अक्टूबर माह में अपने 20 पन्नो के शोध को मेल के जरिये आइजेएसईआर के पास भेजा था।
संस्था ने अपने अनुभवी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से कई चरणों में तथ्यात्मक जांच कराने के बाद पीयूष के शोध को पीएचडी सर्टिफिकेट एवं रिसर्च लेवल अप्रूवल सर्टिफिकेट दे दिया ।
इस शोध के जरिए पीयूष जायसवाल ने बताया कि ब्रह्मांड का अंत भी निश्चित है।
उन्होंने हबल थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए बताया कि ग्रहों की दूरियां बढ़ती जा रही हैं। एक समय बाद वे फिर से सिकुड़ने लगेंगे। इसके लिए मैग्नेटिक थ्योरी का उदाहरण दिया. उन्होंने शोध में बताया कि ग्रह जैसे ही दूर होंगे, उनके अंदर मौजूद गुरुत्वाकर्षण क्षमता बढ़ेगी, जो एक दूसरे ग्रह को आपस में खींचकर ब्रह्मांड को तबाह कर देगी।
पीयूष ने अपने 20 पन्नो के शोध को मेल के जरिए वाशिंगटन डीसी के आईजीएसईआर (इंटरनेशनल जनरल्स आफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग रिसर्च ) को अक्टूबर में भेजा था, तब उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उनके शोध को मान्यता मिल जाएगी। 27 दिसंबर को संस्था ने पीयूष के शोध को मान्यता देते हुए सर्टिफिकेट मेल कर दिया। यह भी लिखा कि बहुत जल्द ही पीएचडी की स्कालर और साइंटिस्ट की उपाधि भी उन्हें दी जाएगी।
