छत्तीसगढ़ के राज्य की पहचान को बढ़ावा देने किसान की अनूठी पहल,राज्य की पहचान बढ़ाने अपने घर की छत पर इन भाजियों को गमलों में लगाया है
धान का कटोरा कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ हरी-भरी भाजियों का भी गढ़ है।
जिले के बहेराडीह गांव के प्रगतिशील किसान दीनदयाल यादव ने राज्य की पहचान बढ़ाने की बड़ी कोशिश
छत्तीसगढ़ की पहचान है 36 भाजी। जी हां आदिवासी संस्कृति, कला, धर्म, खनिज के साथ ही छत्तीसगढ़ की विशेष पहचान यहां की भाजी है। यहां 36 प्रकार की भाजियां पाई जाती है, जिसमें से कई लुप्त होने के कगार है। लेकिन जांजगीर जिले के बहेराडीह गांव के किसान दीनदयाल यादव ने राज्य की पहचान बढ़ाने की बड़ी कोशिश की है।
उन्होंने अपने घर की छत पर इन भाजियों को गमलों में लगाया है। साथ ही सभी के नामों को दीवार पर लिखा गया है। वैसे भी भाजियां सेहत के लिए लाभकारी होता है। कुछ में तो औषधि गुण भी होता है, ऐसे में किसान दीनदयाल की पहल सराहनीय है।
प्रदेश में एक समय भाजियों की 80 प्रजातियां पाई जाती थीं।
इसमें 36 प्रकार की भाजियां ऐसी हैं, जिन्हें आज भी लोग चाव से खा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कृषि वैज्ञानिकों ने शोध में इन भाजियों के तरह-तरह के फायदे भी बताए हैं। शोध में पाया गया है कि कुलथी भाजी से पथरी की बीमारी आसानी से दूर की जा सकती है तो वहीं दूसरी ओर मास्टर भाजी और चरोटा में सर्वाधिक फाइबर होता है, जो पेट की बीमारियां दूर करता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ.जीडी साहू का मानना है कि गांव में आज भी करीब 36 प्रकार की भाजियां खाई जाती है, जिनमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं सब्जी बाजार के दुकानदारों का कहना है कि अब मेथी, पालक और चौलाई के अलावा अन्य भाजियां कम आ रही हैं। पुराने लोग ही तरह-तरह की भाजियों की मांग करते हैं।
