राजधानी के विविध मंदिरों में जन्माष्टमी पर्व शुक्रवार को भक्ति उल्लास से मनाया गया। जैसे ही रात्रि में घड़ी की सुइयां आपस में मिलीं, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंज उठे।
मंदिरों के अलावा सदरबाजार स्थित सिटी कोतवाली में भी जन्मोत्सव मनाया गया। कारागृह में द्वार के बाहर पहरा दे रहे सिपाहियों ने कृष्ण जन्म का मंचन किया। सिपाही गहरी नींद में सो गए।हाथ पैर बेड़ियों में जकड़े थे।
कारागृह के भीतर वासुदेव ने कान्हा की प्रतिमा को टोकरी में रखा और कोतवाली से थोड़ी दूर स्थित गोपाल मंदिर, गोकुलधाम ले गए।
पुराणों में बताए गए भगवान कृष्ण के जन्म के इस दृश्य को नाटकीय ढंग से श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एवं विकास समिति दिखाती है । सिटी कोतवाली से कुछ ही कदम की दूरी पर सदर बाजार के गोपाल मंदिर में यह टोली पहुंचती है यहां नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत पर सभी नाचते झूमते हैं।
पिछले 8 सालों से इस परंपरा को निभाया जा रहा है।
समिति के लोगों ने इससे पहले सरकार से सेंट्रल जेल परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन करने की अनुमति मांगी थी। सुरक्षा कारणों से जेल में अनुमति नहीं मिली, मगर सिटी कोतवाली थाने में इसके बाद लॉकअप के भीतर जन्माष्टमी मनाने की परंपरा चल पड़ी ।
