निजी अस्पतालों में लीवर 20 लाख और किडनी 12 लाख रु. में ट्रांसप्लांट, प्रदेश के चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में यह होगा फ्री सरकारी सुपर स्पेशलिस्टी अस्पताल डीकेएस में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट का न सिर्फ पूरा सेटअप है, बल्कि सर्जन भी हैं।
इसलिए यहां ट्रांसप्लांट शुरू करने में दिक्कत नहीं होगी। प्राइवेट अस्पतालों में लीवर ट्रांसप्लांट में 20 और किडनी में आठ से दस तक तक खर्च होते हैं। सरकारी अस्पताल में मरीजों का ट्रांसप्लांट फ्री होगा। राज्य शासन की ओर से आयुष्मान और डा. खूबचंद बघेल योजना के तहत ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को 6 लाख तक देने का प्रावधान है। डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डाक्टरों के अनुसार इतने में किडनी व लीवर ट्रांसप्लांट हो जाएगा।
इसके साथ एक साल की दवाएं भी फ्री उपलब्ध करवाई जाएंगी, क्योंकि ट्रांसप्लांट के बाद एक साल की दवाओं का कोर्स करना होता है जो काफी महंगा होता है। कई मरीज ट्रांसप्लांट के बाद दवा का खर्च नहीं उठा पाते, जिससे उनका ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो पाता है। राज्य में ब्रेन डेड मरीजों के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मंजूरी देने की प्रक्रिया पिछले पांच साल से चल रही है। अब ये अंतिम चरण में पहुंची है।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए मरीज व अस्पताल के रजिस्ट्रेशन से लेकर सर्जरी तक पूरा सिस्टम कैसे काम करेगा? इसकी एसओपी यानी गाइड लाइन की मंजूरी के लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय में प्रस्तुत कर दी गई है। इस महीने के अंत या अगले महीने मंजूरी मिल जाने की उम्मीद जताई जा रही है। उसके बाद प्राइवेट अस्पतालों के साथ सरकारी में भी ब्रेन डेड मरीजों के ऑर्गन ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएंगे।
