85 जनपद पंचायतों में आदिवासियों का होगा दबदबा, उद्योग के भी लेंगी फैसले..
गुरुवार को कैबिनेट ने पेसा कानून पर मुहर लगा दी है । इसका प्रदेश में बड़ा राजनीतिक महत्व है। सरकारी फैसले के बाद इसका असर सरगुजा, रायगढ़, बस्तर और कांकेर लोकसभा क्षेत्र समेत 29 विधानसभा क्षेत्रों पर होगा। वहीं 32 फीसदी आबादी यानी 80 लाख जनसंख्या वाले 85 जनपद पंचायतों में आदिवासियों का दबदबा होगा। पेसा 5वीं अनुसूची में शामिल अनुसूचित क्षेत्रों के लिए है।
छत्तीसगढ़ में साल 1996 से पेसा कानून बनाने की जद्दोजहद चल रही थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव को यह जिम्मेदारी दे रखी थी। सिंहदेव ने प्रदेश का दौरा भी किया। सरगुजा से बस्तर तक सामाजिक संगठनों और जन प्रतिनिधियों से चर्चा कर राय व सुझाव लिए। बताते हैं कि केंद्र सरकार ने 1996 में नार्थ-ईस्ट के सात राज्यों समेत दस आदिवासी बहुल राज्यों को अपने प्रदेश की व्यवस्था के अनुसार पेसा कानून बनाने की इजाजत दी थी।
