छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने साढ़े 3 माह तक के शिशुओं को डायरिया से बचाने वाले तथा बच्चों के टीकाकरण प्लान में शामिल 2.25 लाख टीके मामूली असावधानी से बर्बाद कर दिए। बाजार में ये टीके 22 करोड़ रुपए से अधिक के हैं।
लापरवाही ये की गई कि राज्य वैक्सीन स्टोर में अफसरों ने इन टीकों को करीब 15 दिन तक माइनस टेंप्रेचर (शून्य से नीचे) में ही रखवा दिया। जबकि इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री तापमान में ही स्टोर करना है। 15 दिन बाद जब अफसरों को इस गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने टीके के इस स्टॉक को चुपचाप वैक्सीन स्टोर में किनारे रखवाया और वहां नॉट फार यूज लिखवा दिया।
सरकारी अस्पतालों में टीका सप्लाई करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट से सोमवार को बच्चों के नियमित टीके की बड़ी खेप भेजी। इन टीकों को वैक्सीन स्टोर में रखा जा रहा था, तब किनारे रखे रोटा वायरस के नॉट फॉर यूज लिखे हुए 2.25 लाख टीके नजर आए।
इन टीकों को फिलहाल कहीं नहीं भेजा जा रहा है और जानकारों ने माना कि इनका इस्तेमाल सही नहीं होगा। पड़ताल के मुताबिक करीब दो माह पहले निर्माता कंपनी सीरम पुणे ने यहां 2.25 लाख वैक्सीन डोज भेजे। इसमें जनवरी 2022 की मेन्यूफैक्चरिंग और दिसंबर 2023 की एक्सपायरी डेट दर्ज है। राज्य वैक्सीन स्टोर में कोरोना टीके स्टोर करने के लिए पिछले साल नया कमरा बनाया गया था।
यहां वॉक इन फ्रीजर रखे हुए हैं। अफसरों ने रोटा वैक्सीन के टीके भी बिना सोचे-समझे इन्हीं फ्रीजरों में रखवा दिए। इनका तापमान शून्य से काफी नीचे रहता है, जबकि वैक्सीन के डिब्बे में साफ लिखा है – प्लस 2 से प्लस 8 डिग्री टेम्प्रेचर में स्टोर करना है।
दो माह पहले अफसरों ने पोलियो ड्रॉप स्टोर करवाई थी। इसे माइनस टेंपरेचर में रखा जाता है। लेकिन इन्हीं के साथ रोटा वायरस वैक्सीन भी रख दी गई। स्टोर के इस हिस्से में आवाजाही नहीं के बराबर है, इसलिए यह गलती नजर नहीं आई। पड़ताल में यह खुलासा भी हुआ कि कुछ साल पहले बीसीजी टीकों को भी माइनस टेंपरेचर में स्टोर किया गया, फिर उन्हें जिलों में भेज दिया गया। बाद में गड़बड़ी खुली तो उन्हें वापस बुलवाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोटा वायरस के डोज 2.25 लाख बच्चों को लगाए जाने थे। दरअसल, एक से पांच साल के बच्चों में मौत की पांच बड़ी वजहों में डायरिया भी है। इसलिए नियमित टीकाकरण में इस टीके को शामिल किया गया। एक साल से कम उम्र के बच्चों को डेढ़ माह, ढ़ाई माह और साढ़े तीन माह की उम्र में इस वैक्सीन के तीन डोज पिलाए जाते हैं। बाजार में एक डोज 990 से हजार रुपए का है। बड़ा नुकसान यह है कि 2.25 लाख टीके बर्बाद होने से बच्चों के नियमित टीकाकरण पर असर पड़ना तय है।
वैक्सीन स्टोर में पड़े हैं नॉट फॉर यूज लिखे 2.25 लाख टीके
22 अगस्त को रात 10 बजे राज्य वैक्सीन स्टोर में भास्कर पहुंचा, तो परिसर के बाहर सीरम इंस्टीट्यूट से आया ट्रक बाहर मिला। ड्राइवर ने बताया कि ट्रक में कई वैक्सीन हैं। रात अधिक हो गई, इसलिए ट्रक डीकेएस के बाहर ग्राउंड में रखेंगे। इसके बाद भास्कर स्टोर में पहुंचा। वहां रोटा वायरस वैक्सीन का स्टाॅक दिखा। नए बैच की वैक्सीन के बक्से बाकी टीकों की तरह स्टोर किए हुए थे।
पुराने टीकों के बक्सों पर नॉट फॉर यूज लिखा था और ये अलग रखे हुए थे। इतने बक्सों में नॉट फॉर यूज टीके की वजह पता लगाई गई, तब खुलासा हुआ कि पूरा स्टॉक दो माह पहले आया, टेंपरेचर की गड़बड़ी से इसे हटाना पड़ गया। तभी पता चला कि यह लॉट 15 दिन से अधिक समय तक शून्य से कम तापमान में रख दिए गए थे।
बर्बादी को ऐसे समझें
- 2.25 लाख वैक्सीन नॉट फॉर यूज
- 1000 रु. तक एक टीके का बाजार मूल्य
- 22.27 करोड़ रु. बर्बाद टीकों का मूल्य
